कुछ दूर हमारे साथ चलो
हम सारी कहानी कह देंगे
समझे ना जिसे तुम अब तक भी
वो बात यहां हम केह देंगे
एक दिन यादों के कोहरे में
वो बात पुरानी जाग उठी
तब परियन्त की उस चिंगारी से
मशालें नवोत्कर्ष कि रोशन हुई
उजागर हुई इस राह पर
कुछ नया करने की चाह जगी
तब लेकर मशाले हाथों में
प्रग्या परिवार के कदम बढ़े
कठिनाई ने हमको रोका भी
बंदिशो ने हमको टोका भी
पर...
हर कठिनाई को हमने पार किया
हर मुश्किल को संग में दूर किया
प्रतिति मे हमने पाठ पढ़ा
चाणक्य जी का सबब लिया
बेची जब चीजे खुद हमने यहां
तो बाजार का नया गुर सीखा
नव्याक्रति में दिखि क्रतियां नयी
एक बबात के दिखे पहलू कई
रंग बिखरे रचनाओं के
नये मनये विचारो को यहां रुपरेखा मिलि
संस्क्रति की जब झलकियां दिखी
गरबे में गुजरात के रंग बिखरे
डांडिये कि खनक ने सबको मोहा
वहीं...
देश की समस्याओं को हमने विचारा
शहिदो को यहां हमने पुकारा
और संग ही संग
मस्ती का खोला पिटारा
मचाकर बालिवुड बादशाह की गुमशुदगी का
बवंडर खूब सारा
यहां हमने खोला ग़्यान का पिटारा
उलेडा मस्ती का भंडारा
और...
दिन भर करके काम खूब सारा
शाम मे उडाया खाना खाजाना
अब हर चाह हमारी पूरी है
पर ग्यान की कडी अभी अधुरी है
होगा लक्ष्य पूरा तभी
जब हर पीढी इस परिवार की
लेकर मशाले हाथो मे
ये प्रग्या मंदिर ही नही
कर देगी उजियारा सन्सार मे
ळे हाथ हमारे साथ चलो
हम दुनिया रोशन कर देगे
कुछ दूर हमारे साथ चलो
हम सारी कहानी कह देंगे





